विनोद कुमार पांडे ब्यूरो चीफ
रायगढ़ में महिला पुलिसकर्मी से अभद्रता: अपराध की निंदा जरूरी, लेकिन कानून के नाम पर दूसरा अपराध क्यों?
छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में महिला पुलिसकर्मी के साथ किया गया आपराधिक कृत्य बेहद शर्मनाक, निंदनीय और समाज को झकझोर देने वाला है। किसी महिला के साथ इस तरह की अभद्रता करना उसके सम्मान, गरिमा और चरित्र पर सीधा हमला है। • • • यह घटना केवल एक व्यक्ति द्वारा किया गया अपराध नहीं है, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। • • • ऐसे अपराधी को कानून के अनुसार कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए, इसमें कोई दो राय नहीं है। • • •लेकिन इस गंभीर और निंदनीय अपराध के बाद जो कार्रवाई सामने आई, उसने कानून के रक्षकों की भूमिका पर भी गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। • • • आरोपी को गिरफ्तार करने के बाद रायगढ़ पुलिस द्वारा उसे सार्वजनिक रूप से चप्पलों की माला पहनाकर, चूड़ियां पहनाकर, लिपस्टिक लगाकर, हथकड़ी में सड़क पर घुमाया गया, जो किसी भी स्थिति में कानूनसम्मत नहीं ठहराया जा सकता। • • • पुलिस का काम गिरफ्तारी और जांच तक सीमित है, सजा देना अदालत का अधिकार है, पुलिस का नहीं। • • •
इस पूरे मामले में आरोपी की बेटी ने सोशल मीडिया और पत्रकारों के सामने आकर भावुक अपील की। • • • उसने कहा कि उसके पिता ने यदि अपराध किया है तो वह यह मानती है कि वे दोषी हैं और सजा भुगतने को भी परिवार तैयार है, लेकिन उन्हें इस तरह सार्वजनिक रूप से अपमानित करने का अधिकार पुलिस को नहीं है। • • • उसका कहना है कि फैसला अदालत और कानून करेगा, पुलिस नहीं। • • •
आरोपी की बेटी ने यह भी कहा कि यदि उसके पिता को मानसिक प्रताड़ना के कारण कुछ होता है या वे कोई गलत कदम उठाते हैं, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी पुलिस प्रशासन की होगी। • • • उसने सवाल उठाया कि जब हर पुलिस थाने में लिखा रहता है कि “कानून हाथ में न लें”, तो फिर पुलिस खुद कानून हाथ में कैसे ले सकती है। • • •
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 हर नागरिक को जीवन और सम्मान के साथ जीने का अधिकार देता है। • • • कोई भी व्यक्ति तब तक अपराधी नहीं माना जाता, जब तक न्यायालय उसे दोषी सिद्ध न कर दे। • • • सार्वजनिक रूप से किसी आरोपी को अपमानित करना, सड़क पर घुमाना या तमाशा बनाना मानवाधिकारों का उल्लंघन है और सुप्रीम कोर्ट भी ऐसे कृत्यों को असंवैधानिक बता चुका है। • • •
महिला पुलिसकर्मी के साथ जो हुआ वह अत्यंत निंदनीय है, लेकिन उसके नाम पर कानून की सीमाएं लांघना भी उतना ही खतरनाक है। • • • न्याय भावनाओं से नहीं, संविधान से चलता है। • • • कानून के रक्षक ही जब कानून को हाथ में लेंगे, तो आम जनता फिर न्याय के लिए किस दरवाजे पर जाएगी। • • •
अगर चाहो तो मैं
