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अरवल्ली गुजरात: प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ में अजेय भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों का प्रचंड जयघोष किया

 रिपोर्ट भरतसिंह आर ठाकोर अरवल्ली गुजरात 


*प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ में अजेय भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों का प्रचंड जयघोष किया*



*प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने प्रभास की धरा पर भव्य शौर्य यात्रा और महापूजा के साथ सांस्कृतिक पुनरुत्थान का एक नया अध्याय लिखा*

*प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी :-*

*• पिछले 1 हजार वर्ष हमें आगामी दशकों तक भारत का भविष्य बनाने की सीख देते हैं*

*• सोमनाथ का इतिहास विध्वंस और पराजय का नहीं, बल्कि विजय और पुनर्निर्माण का इतिहास है*

*• सृजन का मार्ग लंबा होता है, लेकिन वही चिरंजीव होता है*

*• सोमनाथ स्वाभिमान पर्व केवल भूतकाल के गौरव का उत्सव नहीं, बल्कि तीर्थ परंपरा को भविष्य के लिए जीवंत रखने का अवसर है*


*मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल :-*

*• श्री नरेन्द्र मोदी ने हमें सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का भाव और भी मजबूत करने के गौरव गान का अवसर दिया*

*• प्रधानमंत्री की प्रेरणा से मनाया जा रहा सोमनाथ स्वाभिमान पर्व आस्था, आत्मसम्मान और अडिग संकल्प को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा*

*• भगवान श्री सोमनाथ का भव्य मंदिर केवल ईंट-पत्थर नहीं, बल्कि सरदार पटेल की संकल्प शक्ति का प्रतीक है*

*• वीर हमीरजी गोहिल, चौला देवी, वेगड़ा भील जैसे शूरवीरों द्वारा दिया गया बलिदान चिरस्मरणीय*


*गांधीनगर, 11 जनवरी :* प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने अरब सागर के तट पर विराजमान भगवान सोमनाथ के मंदिर पर विधर्मी आक्रांताओं के हमले के एक हजार वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ में शामिल होकर अजेय भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों का जयघोष किया।


उन्होंने शौर्य सभा में बुलंद स्वर में कहा कि पिछले एक हजार वर्ष हमें आगामी दशकों तक भारत के भविष्य निर्माण की सीख देते हैं। सोमनाथ मंदिर केवल एक धार्मिक केंद्र नहीं है, बल्कि यह भारत की अडिग आस्था, स्वाभिमान और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक भी है। सोमनाथ का इतिहास को भुलाने को प्रयास किया गया। इसका इतिहास विनाश और पराजय का नहीं, बल्कि विजय और पुनर्निर्माण का इतिहास है।


प्रधानमंत्री ने कहा कि सोमनाथ मंदिर पर हुए हमले से यह सीख मिलती है कि तलवार की नोक पर कभी किसी का दिल नहीं जीता जा सकता। जो सभ्यताएं दूसरों को मिलाकर आगे बढ़ना चाहती हैं, वे स्वयं समय में खो जाती हैं।


श्री मोदी ने कहा कि सृजन का मार्ग लंबा होता है, लेकिन वही स्थायी और चिरंजीव होता है। सोमनाथ स्वाभिमान पर्व विध्वंस के स्मरण के लिए नहीं, बल्कि हजारों वर्षों की अडिग यात्रा एवं पुनर्निर्माण की यात्रा का उत्सव है। जिस प्रकार सोमनाथ पर लगातार आक्रमण हुए, उसी प्रकार, विदेशी आक्रांताओं द्वारा भारत को खत्म करने की लगातार कोशिशें होती रहीं। लेकिन, न तो सोमनाथ नष्ट हुआ, और न ही भारत। क्योंकि, भारत की आत्मा और उसकी आस्था के केंद्र अविनाशी हैं।

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व समारोह में अपने दौरे के दूसरे दिन प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने भगवान सोमनाथ के समक्ष विधि-विधानपूर्वक पूजा-अर्चना की। इससे पूर्व, वे मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल, उप मुख्यमंत्री श्री हर्ष संघवी और मंत्री श्री जीतूभाई वाघाणी के साथ शौर्य यात्रा में शामिल हुए। 108 घोड़ों और केसरी साफाधारी घुड़सवारों की कूच के साथ निकली शौर्य यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री सहित महानुभावों ने पूरे मार्ग पर भक्तों का अभिवादन स्वीकार किया।


देश की अस्मिता के प्रतीक सोमनाथ मंदिर की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले वीर हमीरजी और भग्न मंदिर का पुनर्निर्माण कराने वाले सरदार पटेल को पटांगण में स्थित उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई।


प्रधानमंत्री ने कहा कि सोमनाथ का इतिहास पराजय का नहीं, बल्कि विजय, धैर्य, त्याग और पुनर्निर्माण का इतिहास है। उन्होंने जोर देकर कहा कि दुनिया के इतिहास में इतनी सदियों की अडिग आस्था और संस्कृति का उदाहरण बहुत कम मिलते हैं और हमारा कर्तव्य है कि आने वाली पीढ़ियां इस विरासत को गौरव के साथ आगे बढ़ाएं।


उन्होंने कहा कि सोमनाथ मंदिर पर गजनवी से लेकर औरंगजेब तक अनेक आक्रांताओं ने हमला किया, लेकिन वे सनातन परंपरा की मूल आत्मा को नहीं समझ पाए। उन्होंने कहा कि ‘सोमनाथ’ के नाम में ही ‘सोम’ यानी अमृत जुड़ा हुआ है और यहां स्थित महादेव चैतन्य, कल्याणकारी तथा अविनाशी शक्ति का प्रतीक हैं।


प्रधानमंत्री ने कहा कि सोमनाथ में विराजमान भगवान शिव ‘मृत्युंजय’ हैं, जिन्होंने मृत्यु को जीत लिया है और जो समग्र सृष्टि के सृजन, पालन और लय के आधार हैं। उन्होंने बलपूर्वक कहा कि भारत की आस्था ऐसी है कि यहां कण-कण में शिव का दर्शन होता है, इसलिए कोई भी आक्रमण इस आध्यात्मिक चेतना को नष्ट नहीं कर पाया है।


श्री मोदी ने कहा कि समय चक्र साक्षी है कि जो ताकतें सोमनाथ को नष्ट करने की मंशा लेकर आईं, वे आज इतिहास के पन्नों में सिमटकर रह गई हैं, जबकि सोमनाथ मंदिर आज भी समुद्र के किनारे गगनचुंबी धर्म-ध्वजा के साथ अडिग खड़ा है।


प्रधानमंत्री ने कहा कि सोमनाथ स्वाभिमान पर्व केवल भूतकाल के गौरव का उत्सव नहीं है, बल्कि तीर्थ परंपरा को भविष्य के लिए जीवंत रखने का अवसर है।


प्रधानमंत्री ने आजादी के बाद के कालखंड का उल्लेख करते हुए कहा कि सोमनाथ के पुनर्निर्माण के लिए सरदार वल्लभभाई पटेल द्वारा लिया गया संकल्प राष्ट्रीय स्वाभिमान का प्रतीक था। उन्होंने कहा कि 1951 में मंदिर के पुनर्निर्माण के समय अनेक बाधाएं खड़ी की गईं, लेकिन जाम साहब महाराजा दिग्विजय सिंह जी जैसे महानुभावों ने राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखकर महत्वपूर्ण योगदान दिया।


प्रधानमंत्री ने चेतावनी देते हुए कहा कि आज भी देश विरोधी और विभाजनकारी ताकतें नए स्वरूपों में सक्रिय हैं। उन्होंने देशवासियों से एकता, सतर्कता और शक्ति के साथ आगे बढ़ने की अपील करते हुए कहा कि अपनी आस्था, जड़ों और विरासत का मजबूती से संरक्षण करने से ही भारत आने वाले हजार वर्षों तक सशक्त बना रहेगा।

प्रधानमंत्री ने आक्रांताओं की मानसकिता पर प्रहार करते हुए जोर देते हुए कहा कि 1000 वर्ष पहले वो आततायी सोच रहे थे कि उन्होंने हमें जीत लिया। लेकिन आज सोमनाथ के मंदिर पर लहरा रही ध्वजा भारत की अजेय शक्ति और सामर्थ्य का प्रमाण दे रही है। यह ध्वजा पूरी सृष्टि को भारत की संकल्प शक्ति का संदेश दे रही है। सोमनाथ महादेव के आशीर्वाद से आज भारत अपनी भव्य विरासत और स्वाभिमान के साथ दुनिया के समक्ष अडिग और अचल खड़ा है।


शौर्य सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने 1000 वर्ष पूरे के इतिहास का स्मरण करते हुए कहा कि हमारी आस्था और श्रद्धा की रक्षा के लिए हमारे पूर्वजों ने अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया था। प्रभास पाटन की इस पवित्र भूमि का कण-कण पूर्वजों के शौर्य, पराक्रम और वीरता का जीवंत साक्षी रहा है। संस्कृति के ध्वजधारकों और शिवभक्तों ने सोमनाथ के गौरव के लिए जो बलिदान दिया था, उसी कारण से आज हमारी संस्कृति अखंड रही है।


प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के लिए अगले एक हजार वर्ष का उनका विराट स्वप्न उन्होंने देश के समक्ष रखा है और ‘देव से देश’ के विजन के साथ आगे बढ़ने का संकल्प व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि आज देश का सांस्कृतिक पुनर्जागरण करोड़ों देशवासियों में एक नया आत्मविश्वास जगा रहा है। आज विकसित भारत को लेकर नागरिकों के मन में दृढ़ विश्वास है।


प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि 140 करोड़ भारतीय भविष्य के लक्ष्यों को लेकर संकल्पबद्ध हैं। भारत अपने गौरव को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा, गरीबी के खिलाफ अपनी लड़ाई में विजय प्राप्त करेगा और विकास की नई उपलब्धियां हासिल करेगा। उन्होंने कहा कि देश दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य और उसके बाद की यात्रा के लिए पूरी तरह से तैयार है।


सोमनाथ मंदिर का सांस्कृतिक विस्तार, सोमनाथ संस्कृत विश्वविद्यालय की स्थापना तथा माधवपुर मेले की बढ़ती लोकप्रियता से भारत की विरासत और मजबूत बन रही होने का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आज का भारत ‘विरासत से विकास’ की प्रेरणा लेकर आगे बढ़ रहा है और सोमनाथ में ‘विकास भी, विरासत भी’ की भावना सतत साकार हो रही है।


उन्होंने जोड़ा की गिर के शेरों के संरक्षण से इस क्षेत्र का प्राकृतिक आकर्षण बढ़ा है और प्रभास पाटण क्षेत्र में विकास के नए आयाम सृजित हो रहे हैं। केशोद हवाई अड्डे के विस्तार से देश-विदेश के श्रद्धालु सीधे सोमनाथ पहुँच सकेंगे, जबकि अहमदाबाद-वेरावल वंदे भारत ट्रेन के प्रारंभ से तीर्थयात्रियों एवं पर्यटकों का समय बच रहा है। इसके अलावा, यात्राधाम सर्किट के विकास से आध्यात्मिक पर्यटन को नई गति मिल रही है।


अंत में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने सोमनाथ स्वाभिमान पर्व को विरासत, अध्यात्म एवं गौरव का संगम बताते हुए कहा कि इस आयोजन में केवल उत्सव नहीं, बल्कि आत्मगौरव की अनुभूति होती है। महादेव के सान्निध्य में इस भव्य व दिव्य आयोजन द्वारा नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति के सामर्थ्य तथा शौर्य के दर्शन हो रहे हैं। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने उपस्थित श्रद्धालुओं का ‘हर हर महादेव’ के जयघोष के साथ आस्था के इस महोत्सव में जुड़ने का आह्वान किया।


*मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल ने सोमनाथ स्वाभिमान पर्व को राष्ट्र के स्वाभिमान तथा अटूट आस्था का पर्व बताते हुए कहा कि* 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रथम सोमनाथ मंदिर हमारी आस्था, आत्मसम्मान तथा अडिग संकल्प का प्रतीक तो है ही, परंतु प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की प्रेरणा से मनाया जा रहा सोमनाथ स्वाभिमान पर्व आस्था की नई ऊंचाइयां पार करेगा।


पिछले एक हजार वर्ष में हुए अनेक आक्रमणों के हमारी आस्था को तोड़ नहीं पाने का उल्लेख करते हुए श्री पटेल ने कहा कि सोमनाथ की अखंड आस्था के प्रतीक भगवान सोमनाथ आज भी विराजमान हैं। इतना ही नहीं, वीर हमीरजी गोहिल, चौला देवी, वेगडा भील जैसे शूरवीरों द्वारा दिए गए बलिदान को आज भी हम सब गौरवपूर्वक याद करते हैं।


मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि ‘स्व’ के उत्कर्ष के लिए कार्यरत समग्र विश्व के प्रयासों के बीच प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने सोमनाथ दादा की रक्षा के लिए समर्पित शूरवीरों की शहादत को इस स्वाभिमान पर्व के माध्यम से याद किया है।


सोमनाथ मंदिर के पुनरुत्थान का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 1000 वर्ष पहले देश की अस्मिता पर हुए आक्रमण के विरुद्ध अडिग रहे स्वाभिमानी योद्धाओं के शौर्य की ज्योति करोड़ों देशवासियों के दिल में स्मरण के रूप में प्रज्ज्वलित रखने और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का भाव अधिक मजबूत करने के गौरव गान का अवसर श्री नरेन्द्र मोदी ने हमें दिया है। यह हम सबके लिए गौरवपूर्ण घटना है।


उन्होंने आगे कहा कि स्वतंत्रता के बाद सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का सरदार साहब का संकल्प आज भव्य मंदिर के रूप में हम देख रहे हैं। यह केवल ईंट-पत्थर नहीं है, बल्कि सरदार साहब की संकल्प शक्ति का प्रतीक है।


प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में यात्राधामों के होलिस्टिक डेवलपमेंट की परंपरा विकसित भारत@2047 का आध्यात्मिक संकल्प होने का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि काशी विश्वनाथ, केदारनाथ, महाकाल, बाबा वैजनाथ धाम, अयोध्या में राम मंदिर, पावागढ मंदिर में ध्वजारोहण, अंबाजी धाम का विकास तथा सोमनाथ स्वाभिमान का यह पर्व उसी श्रृंखला का पर्व है।


श्री भूपेंद्र पटेल ने जन समूह से अपील करते हुए कहा कि ‘विकसित भारत, आत्मनिर्भर भारत’ को हमारा जीवन मंत्र बनाएँ। उन्होंने शुभकामनाएं व्यक्त कीं कि भगवान सोमनाथ श्री नरेन्द्रभाई को अखंड सामर्थ्य दें और सोमनाथ स्वाभिमान पर्व भारत को विश्व गुरु बनाने का पथ बने।


‘जय सोमनाथ’ के बुलंद जयघोष के साथ प्रधानमंत्री का स्वागत करते हुए उप मुख्यमंत्री श्री हर्ष संघवी ने कहा कि सोमनाथ ट्रस्ट के अध्यक्ष के रूप में प्रधानमंत्री का स्वागत करना गौरव का क्षण है। सोमनाथ में आयोजित भव्य शौर्य यात्रा तथा 72 घण्टे के अविरत ओपकार मंत्र जाप का नाद आज समग्र देश में गूंज रहा है।


समुद्र तट से इतिहास का स्मरण करते हुए श्री संघवी ने जोड़ा कि सोमनाथ भारत की आत्मा द्वारा आक्रांताओं को दी गई चुनौती है, गजनवी बिखर गया, परंतु सोमनाथ आज भी अजेय खड़ा है। हमीरजी गोहिल तथा वेगडा भील का बलिदान भारतीय एकता का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है।


सरदार पटेल के संकल्प को दोहराते हुए उप मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत स्वाभिमान का सौदा नहीं करेगा और आज प्रधानमंत्री के नेतृत्व में वही संकल्प भारत की नीति बना है। अब हम आक्रांताओं का महिमामंडन छोड़कर हमारी संस्कृति पर गौरव कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने अयोध्या, काशी एवं महाकाल लोक द्वारा विकास के साथ विरासत का समन्वय कर देश की श्रद्धा को नई भव्यता दी है। आधुनिक भारत के शिल्पकार के रूप में उन्होंने मंदिरों के पुनर्निर्माण द्वारा युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसरों का सृजन किया है।


इस अवसर पर कृषि मंत्री श्री जीतूभाई वाघाणी ने कहा कि सोमनाथ सनातन संस्कृति तथा राष्ट्रीय चेतना का स्वाभिमान है, तो प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी प्रत्येक देशवासियों का स्वाभिमान हैं। गिरनारी संतों तथा साधुओं के आशीर्वाद से पहली बार जूनागढ के भवनाथ क्षेत्र के बाहर दिगंबर साधुओं की रवाडी (यात्रा) निकली। प्रधानमंत्री के नेतृत्व को समग्र विश्व ने स्वीकार किया है और उनके दृढ़ संकल्प से भारत विश्व गुरु बनने की ओर जा रहा है।


इस अवसर पर विभिन्न महानुभावों द्वारा प्रधानमंत्री का स्वागत-सम्मान किया गया।


कार्यक्रम में वन एवं पर्यावरण मंत्री श्री अर्जुनभाई मोढवाडिया, शिक्षा मंत्री डॉ. प्रद्युमन वाजा, ऊर्जा राज्य मंत्री श्री कौशिक वेकरिया, सांसद श्री राजेश चुडासमा सहित आसपास के जिलों के सांसद, विधायक, अग्रणी, साधु-महात्मा और शिव भक्त बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

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