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झांसी। वैज्ञानिक नवाचार ही किसानों की समृद्धि और खाद्य सुरक्षा की स्थायी कुंजी”- कुलपति

 आनन्द बॉबी चावला ब्यूरो चीफ झांसी।


26 दिसंबर 2025


*“वैज्ञानिक नवाचार ही किसानों की समृद्धि और खाद्य सुरक्षा की स्थायी कुंजी”- कुलपति* 

*झांसी।* रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झांसी में 31वीं अटल जय विज्ञान व्याख्यान श्रृंखला–2025 का आयोजन 26 दिसंबर को विश्वविद्यालय में किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन, विश्वविद्यालय कुलगीत एवं वंदे मातरम् के साथ हुआ।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. ओम प्रकाश यादव, पूर्व निदेशक, आईसीएआर–केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (काजरी), जोधपुर ने “भारत की दूसरी हरित क्रांति: क्या यह अनदेखी रह गई?” विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि 1951 से 2025 के बीच भारतीय कृषि में अभूतपूर्व परिवर्तन देखने को मिला है, जिसे हरित क्रांति, द्वितीय हरित क्रांति और सदाबहार (एवरग्रीन) क्रांति के क्रमिक विकास के रूप में समझा जा सकता है।

डॉ. यादव ने बताया कि वर्ष 1951 में देश का कुल खाद्यान्न उत्पादन लगभग 50 मिलियन टन था, जो 2025 तक बढ़कर 330 मिलियन टन से अधिक हो गया है। धान का उत्पादन 21 मिलियन टन से बढ़कर लगभग 135 मिलियन टन तथा गेहूं का उत्पादन 6 मिलियन टन से बढ़कर 115 मिलियन टन से अधिक हो गया। इसी अवधि में धान की उत्पादकता 700 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर से बढ़कर 2,800 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर, जबकि गेहूं की उत्पादकता 3,500 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर तक पहुंच गई।

उन्होंने कहा कि द्वितीय हरित क्रांति में मक्का, ज्वार और बाजरा जैसे मोटे अनाजों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। मक्का का उत्पादन 2 मिलियन टन से बढ़कर 35 मिलियन टन से अधिक हो गया तथा इसकी उत्पादकता 550 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर से बढ़कर लगभग 3,200 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर तक पहुंची। ज्वार और बाजरा में क्षेत्रफल घटने के बावजूद उन्नत किस्मों और वैज्ञानिक तकनीकों के माध्यम से उत्पादकता में दो से तीन गुना वृद्धि दर्ज की गई।


डॉ. यादव ने कहा कि सदाबहार क्रांति का उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी है। जल-संरक्षण, जलवायु-अनुकूल किस्में, पोषक अनाज और टिकाऊ कृषि पद्धतियां इसके प्रमुख स्तंभ हैं। वर्ष 2025 तक मोटे अनाजों का कुल उत्पादन लगभग 50 मिलियन टन तक पहुंच चुका है, जो पोषण सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में सहायक सिद्ध हो रहा है।


कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रो. अशोक कुमार सिंह, कुलपति, आरएलबीसीएयू, झांसी ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी के “जय विज्ञान” मंत्र को स्मरण करते हुए कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार और तकनीकी हस्तांतरण ही किसानों की समृद्धि तथा देश की खाद्य सुरक्षा का स्थायी मार्ग है। उन्होंने वैज्ञानिकों और विद्यार्थियों से जलवायु-संवेदनशील एवं टिकाऊ कृषि के लिए सतत प्रयास करने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में स्वागत संबोधन डॉ. अनिल कुमार, निदेशक शिक्षा द्वारा दिया गया। व्याख्यान के उपरांत मुख्य वक्ता का सम्मान किया गया। इस अवसर पर डॉ. जितेंद्र कुमार तिवारी, डॉ. शुभा त्रिवेदी, डॉ. वैभव सिंह सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक, वैज्ञानिक, अधिकारी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।


आनन्द बॉबी चावला झांसी।

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