लोकेशन आलोट रिपोर्टर सुनील चोपड़ा
परमात्मा सर्व शक्तिमान है, लेकिन मनुष्य बडा होना चाहता है
जबकि भारत में साढे पांच हजार नदियों बहती है वो समुद्र को बडा और धरती, आसमान को बडा बताती है तथा भगवान अपने भगत को बडा बताते है । इसलिए सबसे बड़ा वही है जिसके ह्रदय में भगवान बैठे हो, ऐसा भाव होना चाहिए।यह विचार मालव माटी के गुरुदेव संतश्री पं. कमलकिशोरजी नागर ने आलोट से करीब 18 किलोमीटर दूर बडौद रोड पर स्थित श्रीकृष्ण गौशाला परिसर में ग्राम माल्या के धर्मप्रिय ग्रामवासीयों व्दारा आयोजित सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन बुधवार को व्यक्त किये। उन्होंने आगे बताया कि जैसे सिंहासन सोने-चांदी का सुंदर बना लो, लेकिन मूर्ति बिठाओगें तो वह हिलने-डोलने लगती है, क्योंकि उसके टिकने के लिए गादी नही है। वैसे ही जब तक मनुष्य के ह्रदय में भाव नही बढेगें तब तक हिलेगा डोलेगा और भाव बढाने का काम कथा करती है।
संतश्री ने कहा कि राम से बडा उनका नाम है और श्रीकृष्ण से बडा उनकी कथा है, इसी प्रकार नारी से बडा उसका सुहाग है। उन्होंने कहा कि क्रोधी, लोभी के साथ बैठेगें तो वही अवगुण आ जाएगें, इनसे बचना चाहिए।
उन्होंने कहा कि शबरी के प्रेम भाव से ही भगवान श्रीराम ने उसके बेर खाए, सूरदास तर गया, यही नही भगवान को सौ गाली देने वाले को उन्होंने मुक्ति दे दी और परमात्मा तो इतने दयालु है कि प्रेमभाव से अंधे, गूंगे, बहरें, लूले-लगंडे, बुध्दीहीन तक को तार दिया ।
संतश्री ने कहा कि संकट आने पर मनुष्य का भाव भगवान के प्रति कम हो जाता है, यह ठीक नही है क्योंकि रोहिणी की तपन अधिक नही होगी तो फसल अधिक नही आएगी, यह बात खेती करने वाला किसान अच्छे से समझता है। इसलिए भगवान के प्रति हमारा भाव ब्याज की गति से बढना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आजकल कोई सुनना पसंद नही करता है, जिस कारण से भाई, अपने भाई की, बेटा अपने पिता की, बहु, सास की, नौकर अपने मालिक की नही सुनता है और कलह होता है। यदि हम सुनना शुरु और जवाब देना बंद कर देगें तो पुलिस थाना, अदालत बंद हो जाएगी। इसलिए संभलकर बोले और ऐसा बोले कि उससे सामने वाले को आग न लगे।
संतश्री के कथा वाचन के पूर्व बालसंत गोविंदजी ने भी प्रवचन दिए ।
