चौरासी लाख योनियों में भटकने के बाद भगवान मनुष्य देह प्राप्त करते हैं: आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज
ब्यूरो रिपोर्ट TTN 24 News
🙏🙏🌹🌹🌹🙏🙏🌹🌹"सादर जय सियाराम"
🌹"आध्यात्मिक यात्रा"🌹
भगवान श्री हरि की जब अनंत कृपा होती है ।
भगवान श्री हरि की जब विशेष कृपा होती है ।
तब जा के चौरासी लाख योनियों में भटकने के बाद भगवान मनुष्य देह प्राप्त करते हैं ।
तिरासी लाख निन्यानबे हजार नौ सौ निन्यानबे को भोगते-भोगते आये है तब जा के अंतिम शरीर मनुष्य शरीर मिल हैं ।
संसार में कोई ऐसा देह नहीं है जिससे भगवत प्राप्ति कर लिया जाए सिर्फ एक मनुष्य शरीर छोड़ के , शेर में बल पर बुद्धि नहीं है ।
हाथी में बल है पर बुद्धि नहीं है ।
पुण्य केवल व केवल इस मनुष्य शरीर से किया जा सकता है ।
भगवान के खजाने में सबसे दुर्लभ वस्तु है ।
श्रीमद्भागवत पुराण में व्यास जी कह रहे हैं ।
"दुर्लभों मानुषों देहों देहीनां क्षणभंगुर: ।
तत्रापि दुर्लभं मन्ये
वैकुण्ठप्रियदर्शनम् ।।
अगर भगवान के खजाने में सबसे दुर्लभ कोई वस्तु कोई चीज है तो यह मनुष्य का शरीर मिल जाना ही दुर्लभ है ।
इसलिए अनिश्चित मनुष्य जीवन में भगवान के प्यारे भक्त संतों के दर्शन तो और भी दुर्लभ है ।
आपका मार्गदर्शक आपके पूज्य गुरुदेव ,
[आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज]
संपर्क सूत्र:-6396372583,
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