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झांसी। विकसित कृषि - विकसित भारत @ 2047 विषय पर आयोजित अखिल भारतीय किसान मेला एवं कृषि प्रदर्शनी - 2026 में लगाए, स्टॉलों को पुरूस्कृत कर हुआ सम्पन्न

 आनन्द बॉबी चावला ब्यूरो चीफ झांसी।


*दिनांकः16.02.2026*


हेडिंग

*विकसित कृषि - विकसित भारत @ 2047 विषय पर आयोजित अखिल भारतीय किसान मेला एवं कृषि प्रदर्शनी - 2026 में लगाए* *हुए स्टॉलों को पुरूस्कृत कर हुआ सम्पन्न* 

एंकर

झाँसी। रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित चौथे अखिल भारतीय किसान मेला एवं कृषि प्रदर्शनीद-2026 का आज गरिमामय वातावरण में सफल समापन हुआ। “विकसित कृषि-विकसित भारत @2047” थीम पर आधारित इस तीन दिवसीय आयोजन में देश के विभिन्न राज्यों से आए प्रगतिशील किसानों, कृषि वैज्ञानिकों, कृषि उद्यमियों, स्वयं सहायता समूहों, किसान ऊत्पादक संगठनो, कृषि विश्वविद्यालयो, कृषि विज्ञान केन्द्रों एवं कृषि से जुड़ी संस्थाओं ने सक्रिय सहभागिता के साथ साथ बुंदेलखंड से 10,000 से अधिक किसानो ने प्रतिभाग किया।

समापन सत्र के मुख्य अतिथि महापौर झाँसी, विहारी लाल आर्य ने अपने संबोधन में कहा कि वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई की धरा पर यह किसान मेला यहां के किसानों के लिए वरदान साबित होगा। कृषि वैज्ञानिकों ने जो मनन किया है, नई तकनीके विकसित की हैं उनकी जानकारी कर किसान खेती करें। बुंदेलखण्ड में किसानों के लिए प्रधानमंत्री जी एवं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री जी विभिन्न लाभकारी योजनाएं चला रहे हैं जिससे किसान विकसित हो सके। आज धरातल पर प्रगतिशील कृषि कार्य देखने को मिल रहे हैं। केन वेतवा परियोजना द्वारा किसान खुशहाल होगा। झाँसी में वीडा, बुंदेलखण्ड एक्सप्रेसवे जैसी तमाम योजनाएं आने से झाँसी प्रगति की ओर अग्रसर है। आज दुनिया भारत को शक्ति मान रही है। प्रधानमंत्री जी ने भारत की तकदीर तस्वीर बदलने का कार्य किया है। विकसित कृषि - विकसित भारत @ 2047 का संकल्प अवश्य पूरा होगा। यह रानी लक्ष्मी बाई केन्द्रीय कृषि विवि द्वारा लगाया गया किसान मेला बुंदेलखण्ड के किसानों के लिए मील का पत्थर साबित होगा। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही लाभकारी योजनाओं की भी उन्होंने जानकारी दी। कृषक हमारे देवता हैं उगाते अन्न हैं।

विशिष्ट अतिथि विमल कुमार दुबे, (आईएएस) मण्डलायुक्त, झाँसी मंडल झाँसी ने कहा कि उत्तर प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी बनाने में किसानों की निर्णायक भूमिका होगी। राज्य एवं केंद्र सरकार किसानों के हितों के प्रति प्रतिबद्ध हैं और वर्तमान कृषि बजट किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी है। किसान क्रेडिट कार्ड, उन्नत बीज, खाद, सिंचाई, कृषि उपकरण, उद्यान विकास तथा सोलर कुसुम योजना के माध्यम से 80 से 90 प्रतिशत तक अनुदान जैसी अनेक योजनाएँ किसानों को सशक्त बना रही हैं। झाँसी मंडल का एग्रीसेट के 20,000 क्लस्टर में चयन तथा एरच बाँध परियोजना के पूर्ण होने से क्षेत्र को सिंचाई एवं पेयजल की बड़ी सुविधा मिलेगी।

उन्होंने कहा कि कृषि विश्वविद्यालय में स्थापित “श्री अन्न उत्कृष्टता केंद्र” एवं “जैविक और प्राकृतिक खेती उत्कृष्टता केंद्र” की प्रयोगशालाओं से किसानों को ऑर्गेनिक प्रमाणन की सुविधा मिलेगी, जिससे श्रीअन्न का रकबा बढ़ेगा। विश्वविद्यालय द्वारा हाईटेक नर्सरी से तुरई, खरबूजा, खीरा आदि की गुणवत्तापूर्ण पौध उपलब्ध कराना सराहनीय पहल है। उन्होंने बुंदेलखंड के किसान उत्पादक संगठनों एवं उद्योगपतियों के साथ अंतरराष्ट्रीय समिट आयोजित करने की आवश्यकता पर बल दिया तथा किसानों से आह्वान किया कि वे कृषि विज्ञान केंद्रों एवं विश्वविद्यालय द्वारा विकसित नई तकनीकों को अपनाएँ। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह मेला बुंदेलखंड में कृषि परिवर्तन का आधार बनेगा और किसान यहाँ प्राप्त ज्ञान को अपने गाँवों में अवश्य लागू करेंगे।

अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति प्रो. अशोक कुमार सिंह ने कहा कि विकसित कृषि कैसे हो, इसके लिए इस मेले में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् की 14 संस्थाएं, कृषक उत्पादन संगठन, प्रगतिशील किसान आए हुए हैं और किसानों को विभिन्न तकनीकियों की जानकारी दे रहे हैं। विवि का प्रयास भी सफल होता दिखाई दे रहा है किसानों के खेतों पर विवि ने जो फसलें लगवाई गई थीं उनमें परिवर्तन आया है। कुछ ग्रामों में मैंने स्वयं जाकर देखा कि सब्जी, सरसों आदि फसलों में प्रगति आई है साथ ही साथ पशुपालन में शाहीवाल गाय और मुर्रा भैंस से किसानों के यहां दुग्ध पालन में प्रगति देखने को मिली है। कुलपति ने कहा कि कृषि विश्वविद्यालय नई पौध, नया उन्नत बीज एवं यहां के कृषि वैज्ञानिक किसानों के लिए हमेशा समर्पित हैं।


निदेशक शोध डॉ. एस.के. चतुर्वेदी, ने मेले में प्राप्त सुझावों एवं संस्तुतियों का विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया और उन्हें भविष्य की शोध एवं प्रसार योजनाओं में सम्मिलित करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। तीन दिवसीय मेले में हुए आयोजनों की विस्तृत जानकारी दी।

निदेशक प्रसार शिक्षा/मेला संयोजक डॉ. सुशील कुमार सिंह, ने स्वागत संबोधन प्रस्तुत करते हुए मेले की उपलब्धियों का उल्लेख किया। तीन दिवसीय यह आयोजन किसानों के लिए ज्ञान, नवाचार एवं प्रेरणा का सशक्त मंच बनकर कृषि उन्नयन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हुआ।


तीनों दिनों में कृषि के विविध आयामों पर तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, इनमें प्राकृतिक एवं जैविक खेती, मोटे अनाज उत्पादन, उन्नत बीज प्रौद्योगिकी, फसल विविधीकरण, एकीकृत कृषि प्रणाली, पशुपालन, मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन, कृषि यंत्रीकरण, कृषि स्टार्टअप्स एवं उद्यमिता जैसे विषय प्रमुख रहे। विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने किसानों की समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करते हुए वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाने का आह्वान किया।

इस मेले में श्री अन्न का स्टॉल विशेष आकर्षण का केंद्र रहा, इसमें पोषण सुरक्षा, प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन पर विभिन्न प्रकार के मॉडल प्रदर्शित किये गए। स्वयं सहायता समूहों द्वारा मिलेट आधारित उत्पादों सिवई, पापड़, बेकरी उत्पाद एवं अन्य प्रसंस्कृत सामग्री की प्रदर्शनी ने किसानों एवं आगंतुकों को विशेष रूप से आकर्षित किया।


मेले के दौरान किसान-वैज्ञानिक संवाद कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, इसमें किसानों ने अपनी समस्याएँ रखीं और विशेषज्ञों ने व्यावहारिक समाधान सुझाए। इसके अतिरिक्त कृषि आधारित प्रतियोगिताएँ, प्रश्नोत्तरी एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने आयोजन को जीवंत बनाया।

किसान मेला एवं कृषि प्रदर्शनी-2026 के दौरान विभिन्न श्रेणियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले संस्थानों को मंचासीन अतिथियों द्वारा सम्मानित किया गया। आईसीएआर संस्थानों में केंद्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान को प्रथम, भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान को द्वितीय तथा भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान एवं राष्ट्रीय बीज मसाला अनुसंधान केंद्र को तृतीय पुरस्कार प्रदान किया गया। कृषि विज्ञान केंद्र/निदेशालय श्रेणी विस्तार निदेशालय, बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय एवं विस्तार निदेशालय, आरवीएसकेवीवी को प्रथम, विस्तार निदेशालय, चंद्रशेखर आज़ाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय और विस्तार निदेशालय, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय को द्वितीय, जबकि कृषि विज्ञान केंद्र, चित्रकूट एवं कृषि विज्ञान केंद्र, कोटा को तृतीय पुरस्कार प्राप्त हुआ।


निजी कंपनियों में दयाल ग्रुप और शक्ति वर्धक हाइब्रिड सीड्स प्राइवेट लिमिटेड को प्रथम पुरस्कार प्रदान किया गया।

वीएनआर नर्सरी, इकोसेफ एग्रीसाइंस इंडिया प्रा. लिमिटेड एवं धानुका एग्रीटेक लिमिटेड को द्वितीय, जबकि क्रिस्टल क्रॉप प्रोटेक्शन लिमिटेड, एक्सेस डेवलपमेंट सर्विसेज, ट्रॉपिकल एग्रोसिस्टम और इंडोरामा को तृतीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

एफपीओ/एनजीओ श्रेणी में बालिनी, रामराजा मल्टी-स्टेट एग्रो को-ऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड, कृष्णा पिकल्स और फलिन्द्रा-शर्लिन प्लांट आर्ट एंड बेग में एफएफ सीपीआई/एनजीओ श्रेणी में शामिल हैं। बोनसाई मंडप को प्रथम, अमरौख अर्थ जैव ऊर्जा एफपीओ एवं ठाकुर रामराजा प्राकृतिक जैविक कृषि धाम को द्वितीय, तथा मंजरी फाउंडेशन को तृतीय पुरस्कार प्रदान किया गया। इन सभी अवॉर्डियों ने अपने नवाचार, गुणवत्ता एवं कृषक हितैषी प्रयासों से मेले की गरिमा को नई ऊँचाई प्रदान की।


इस अवसर पर विभिन्न ग्रामों से आए किसान, विवि के सभी अधिकारी, विभागाध्यक्ष, वैज्ञानिक, विद्यार्थी, शैक्षणिक - अशैक्षणिक कर्मचारी विभिन्न राज्य एवं केन्द्र संस्थाओं के कर्मचारी उपस्थित रहे। 

संचालन डॉ. प्रभात तिवारी एवं सभी लोगों का आभार डॉ. अर्तिका सिंह ने व्यक्त किया।


कैमरामैन शिवम् के साथ आनन्द बॉबी चावला झांसी।

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