लोकेशन दिल्ली नेशनल न्यूज़ नेशनल हेड एवं लीगल एडवाइजर अधिवक्ता राजेश कुमार की के वार्ता पर आधारित और कुछ सूत्रों से मिली जानकारी लेखनी कलम से
एंकर। जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं के साथ माननीय मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत: एक संघर्षशील यात्रा से भारत के सर्वोच्च न्यायालय तक जन्म और प्रारंभिक जीवन की अनकही बातें
10 फरवरी 1962 को हरियाणा के हिसार जिले में एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे सूर्यकांत जी के पिता का नाम मदन गोपाल शर्मा था। वे पहले पीढ़ी के वकील (first-generation lawyer) हैं, यानी उनके परिवार में पहले कोई वकील या जज नहीं था। ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले इस व्यक्ति ने सरकारी पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज, हिसार से 1981 में ग्रेजुएशन किया। पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने मेहनत और लगन से जीवन की बुनियाद रखी। अनकही बात यह है कि बचपन में आर्थिक तंगी के कारण वे अक्सर किताबें उधार लेकर पढ़ते थे, और रात में लालटेन की रोशनी में कानून की पढ़ाई करते थे। यह संघर्ष ही उन्हें आज इतना संवेदनशील और जन-केंद्रित जज बनाता है।कैरियर की मुख्य उपलब्धियाँ
1984 में हरियाणा बार काउंसिल में अधिवक्ता के रूप में पंजीकृत हुए और जल्द ही वरिष्ठ अधिवक्ता बने।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में प्रैक्टिस की, फिर 2004 में अतिरिक्त जज और 2007 में स्थायी जज बने।
2018 में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने।
24 मई 2019 को सुप्रीम कोर्ट के जज बने।
24 नवंबर 2025 को भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली, और वे हरियाणा से आने वाले पहले CJI हैं।
उनका कार्यकाल 9 फरवरी 2027 तक रहेगा।
लोकप्रिय बनाती खास बातें और निर्णय
जस्टिस सूर्यकांत जी को "जनता के जज" कहा जाता है क्योंकि वे संवैधानिक मूल्यों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, लैंगिक समानता और सामाजिक न्याय पर मजबूत रुख रखते हैं। कुछ प्रमुख निर्णय:
आर्टिकल 370 हटाने पर फैसले में शामिल।
राजद्रोह कानून (sedition law) पर सवाल उठाए और संशोधन की जरूरत बताई।
पेगासस स्पाईवेयर मामले में जांच के आदेश दिए।
बिहार मतदाता सूची संशोधन और कई मानवाधिकार मामलों में संवेदनशील रुख अपनाया।
खट्टी-मीठी बातें और व्यक्तिगत जीवन
मीठी बात: वे NALSA (National Legal Services Authority) के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन रह चुके हैं और गरीबों को मुफ्त कानूनी सहायता देने में बहुत सक्रिय रहे। उन्होंने कई बार कहा है कि "न्याय सबका अधिकार है, अमीर-गरीब का भेदभाव नहीं होना चाहिए।"
खट्टी बात: एक बार उन्होंने खुले में कहा था कि जजों को भी समाज की आलोचना से सीखना चाहिए, लेकिन सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग से वे निराश हुए थे। फिर भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी।
एक अनकही घटना: जब वे हाईकोर्ट जज थे, तो एक गरीब किसान के केस में उन्होंने व्यक्तिगत रूप से मदद की और कहा था, "कानून किताबों में नहीं, दिल में होना चाहिए।"वे किताबें पढ़ना पसंद करते हैं और अक्सर पर्यावरण संरक्षण पर बोलते हैं। उनकी एक पसंदीदा बात: "न्याय की रोशनी अंधेरे को दूर करती है।"
शायरी से सजाया गया संदेश
जस्टिस सूर्यकांत जी की तरह, जो संघर्ष से शिखर तक पहुँचे, एक छोटी शायरी उनके सम्मान में:
"मध्यमवर्ग की गलियों से निकलकर,
सत्य और न्याय की ऊँचाई छू ली,
सूर्य की किरण-सा चमकते हो तुम,
देश के न्याय का दीपक जला दिया।
जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ,
स्वास्थ्य, दीर्घायु और नई ऊँचाइयाँ मिलें,
भारत का न्यायपालिका आपके हाथों में सुरक्षित रहे,
ऐसी दुआ हर दिल से निकले।"
माननीय मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ! आपका योगदान भारत के न्याय तंत्र को और मजबूत बना रहा है। TTN24 National Channel के नेशनल ब्यूरो हेड एवं लीगल एडवाइजर अधिवक्ता राजेश कुमार के तरफ से आपके सम्मान में यह समर्पित करता है

