रिपोर्ट भरतसिंह आर ठाकोर अरवल्ली गुजरात 9638076908
*गुजरात के नपा क्षेत्रों में उजड़े पड़े उद्यानों की बदल रही है सूरत : विकसित हो रहे हैं नंदन वन जैसे हरित उद्यान, जहां शहरीजन बिता सकते हैं सुकून भरे पल*
*अमृत 2.0 के तहत राज्य के शहरी क्षेत्रों में 117.56 करोड़ रुपए के खर्च से 131 उद्यान विकसित हो रहे हैं, जिनमें से 70 उद्यानों का विकास कार्य हुआ पूर्ण*
*लाठी नपा में 1.26 करोड़ रुपए के खर्च से भवानी गार्डन का हुआ सौंदर्यीकरण, जबकि पालनपुर नपा में 2.25 करोड़ रुपए से कैलास वाटिका का पुनर्विकास*
*बाग-बगीचों और खुले स्थानों के विकास से शहरी हवा की गुणवत्ता सुधारने और हरित आवरण को बढ़ाने का उद्देश्य*
*गांधीनगर, 12 फरवरी :* भारत के शहरों को जल सुरक्षित एवं आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में 1 अक्टूबर, 2021 को अटल कायाकल्प और शहरी परिवर्तन मिशन (अमृत) 2.0 योजना शुरू की गई थी। इस मिशन की मुख्य पहलों में जल स्रोतों को पुनर्जीवित करना, गैर-राजस्व जल (एनआरडब्ल्यू) में कमी करना और शुद्ध किए गए अपशिष्ट जल के पुनः उपयोग को बढ़ावा देना शामिल है। इसके साथ ही, यह मिशन शहरी क्षेत्रों की सुविधाओं में वृद्धि करने के लिए अच्छी तरह से बनाए हुए हरित स्थानों और उद्यानों के विकास पर भी बल देता है।गुजरात में मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में राज्य के नगर पालिका क्षेत्रों में अमृत 2.0 के अंतर्गत हरित स्थानों और बाग-बगीचों का विकास किया जा रहा है। गुजरात की विभिन्न नगर पालिकाओं में उजड़े पड़े उद्यानों के पुनर्विकास के साथ-साथ नए बाग-बगीचे भी विकसित किए जा रहे हैं। इसका बेहतरीन उदाहरण लाठी नगर पालिका में विकसित किया गया भवानी गार्डन है। इस भवानी गार्डन को पुनर्विकसित कर नंदन वन जैसा मनोरम, भव्य और हरा-भरा बगीचा बनाया गया है, जिसका आज लाठी के नागरिक भरपूर आनंद उठा रहे हैं।उल्लेखनीय है कि अमृत 2.0 के तहत राज्य के शहरी स्थानीय निकायों में 117.56 करोड़ रुपए के खर्च से कुल 131 उद्यान विकसित करने का लक्ष्य है, जिनमें से 70 का विकास कार्य पूरा हो चुका है, जबकि शेष 61 उद्यानों को विकसित करने का कार्य अभी प्रगति पर है।
*1.26 करोड़ रुपए के खर्च से लाठी में भवानी गार्डन का हुआ कायापलट*लाठी नगर पालिका क्षेत्र में स्थित भवानी गार्डन उजड़ गया था, स्थानीय लोग इसका कोई उपयोग नहीं करते थे। अमृत 2.0 योजना के तहत राज्य सरकार के शहरी विकास विभाग ने इस उद्यान को पुनर्विकसित करने का निर्णय किया। आज भवानी गार्डन की सूरत पूरी तरह से बदल गई है। लाठी नगर पालिका में भवानी गार्डन का सौंदर्यीकरण एक महत्वपूर्ण पर्यावरणीय और सामुदायिक पहल है, जिसका उद्देश्य उद्यान के पारिस्थितिक (इकोलॉजिकल) संतुलन को पुनः स्थापित करना और इसकी सुंदरता को बढ़ाकर इसे आकर्षक बनाना है।
बगीचे में जो पेड़ पहले से थे, उन्हें बचाकर रखा गया है, और वॉक-वे तथा बगीचे के आसपास देसी प्रजाति के पेड़ लगाए गए हैं, ताकि प्रवासी और स्थानीय पक्षियों के लिए प्राकृतिक निवासस्थान बनाया जा सके। इस बगीचे का विकास हर उम्र के लोगों को ध्यान में रखते हुए किया गया है, जिसमें विभिन्न गतिविधियों के लिए भी स्थल विकसित किए गए हैं। इसमें खुला लॉन एरिया, बच्चों के खेलने का क्षेत्र, ओपन जिम एरिया यानी शारीरिक कसरत करने का क्षेत्र तथा योग एवं नॉलेज सेंटर शामिल हैं। उद्यान के मध्य में श्वेत अश्वों की एक आकर्षक फव्वारे वाली मूर्ति भी बनाई गई है, जो इस बगीचे के सौंदर्य को और बढ़ाती है। समूचे भवानी गार्डन को 1.26 करोड़ रुपए के खर्च से 10,936.35 वर्ग मीटर क्षेत्र में विकसित किया गया है, जिसका लोग भरपूर लाभ उठा रहे हैं।*2.25 करोड़ रुपए के खर्च से पालनपुर नपा में कैलास वाटिका गार्डन का पुनर्विकास*
पालनपुर नगर पालिका में लोगों के मनोरंजन के लिए 2.25 करोड़ रुपए के खर्च से 10,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में कैलास वाटिका का पुनर्विकास किया गया है। इस बगीचे में नागरिकों के लिए विभिन्न सुविधाएं विकसित की गई हैं, जिनमें बच्चों के खेलने का क्षेत्र और उसके सामान, दिव्यांगों के लिए विशिष्ट सुविधाएं, गजेबो और बैठक व्यवस्था आदि शामिल हैं। कैलास वाटिका आज पालनपुर के लोगों के लिए नंदन वन बन गया है।
इसी प्रकार, विभिन्न नगर पालिका क्षेत्रों में लगभग 70 बगीचों को शहरीजनों के लिए विकसित किया गया है, जबकि अन्य 61 बगीचों का काम प्रगति पर है। अमृत 2.0 के अंतर्गत राज्य के शहरी क्षेत्रों में ऐसे हरित क्षेत्र बनाने का उद्देश्य टिकाऊ, समावेशी और समुदाय-केंद्रित शहरी वातावरण को बढ़ावा देना और शहरीजनों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना है। इसके साथ ही, ऐसे बगीचे शहरी हवा की गुणवत्ता को भी और बेहतर बनाते हैं, और घने शहरी क्षेत्रों में पारिस्थितिक संतुलन को पुनः स्थापित करने में मदद करते हैं। देसी पौधों और पेड़ों के एकीकरण द्वारा यह हरित क्षेत्र स्थानीय जैव विविधता को समर्थन देते हैं। खास बात यह है कि इसके लिए कम पानी एवं रखरखाव की जरूरत होती है।
कुल मिलाकर, अमृत 2.0 योजना के क्रियान्वयन से गुजरात के शहरी जीवन में उल्लेखनीय सुधार हो रहा है, जिससे शहरों और नगरों में स्थिरता, लचीलेपन और खुशहाली को बढ़ावा मिला है।



