स्वाभिमान हमें अपने आत्म-सम्मान और पहचान के बारे में बताता है: आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज
🙏🙏🌹🌹🌹🙏🙏🌹🌹"सादर जय सियाराम"
जब कोई इंसान रिश्ते निभाना बंद कर देता है तो अक्सर इसका तात्पर्य है कि उसके स्वाभिमान को कहीं न कहीं ठेंस पहुंची है ।
यह ठेस इतनी गहरी हो सकती है कि वह व्यक्ति उस रिश्ते को आगे बढ़ाने में असमर्थ हो जाता है ।
स्वाभिमान एक ऐसा पहलू है जो हमें अपने आत्म-सम्मान और पहचान के बारे में बताता है ।।जब यह ठेस पहुंचाता है ।
तो व्यक्ति अपने आप को बचाने के लिए रिश्ते से दूरी बनाने लगता है ।
यह एक तरह का आत्म-रक्षा का तरीका होता हैं ।
आपका मार्गदर्शक आपके पूज्य गुरुदेव ,
[आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज]
संपूर्ण विश्व ,
संपर्क सूत्र:-6396372583,
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